स्कूल नहीं, कीचड़ का तालाब बना शिक्षा का मंदिर! नेवासपुर के सरकारी स्कूल की बदहाल तस्वीर ने खोली व्यवस्था की पोल।

1 अगस्त 26 /मुंगेली

छत्तीसगढ़ के मुंगेली जिले के ग्राम नेवासपुर स्थित शासकीय स्कूल की बदहाल स्थिति ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार बारिश के बाद स्कूल का मुख्य प्रवेश द्वार पूरी तरह कीचड़ और जलभराव की चपेट में आ गया है। ऐसे में रोजाना 5 से 10 वर्ष तक के मासूम बच्चों को गंदे पानी और कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है।कीचड़ के कारण बच्चों की किताबें और कॉपियां भीग रही हैं, जूते-चप्पल खराब हो रहे हैं और संक्रमण व अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक कोई ठोस कदम उठाता नजर नहीं आ रहा है।देश आजादी के 75 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। सरकारें शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने, करोड़ों रुपये खर्च करने और “शिक्षा का त्योहार” जैसे अभियान चलाने के दावे करती हैं। अखबारों, टीवी और होर्डिंग्स पर विकास के बड़े-बड़े विज्ञापन दिखाई देते हैं, लेकिन नेवासपुर के इस सरकारी स्कूल की तस्वीर इन दावों की हकीकत बयां करती नजर आती है।ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर ग्राम पंचायत और शिक्षा विभाग की जवाबदेही कहां है? यदि बच्चों को स्कूल तक सुरक्षित पहुंचने का रास्ता भी उपलब्ध नहीं कराया जा सकता, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावे कैसे पूरे होंगे?ग्रामीणों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि स्कूल परिसर में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कर मुख्य प्रवेश द्वार की तत्काल मरम्मत कराई जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में शिक्षा मिल सके।स्थान: ग्राम नेवासपुर, जिला मुंगेली, छत्तीसगढ़।

इसी प्रदेश की कई स्कूलों की यही तस्वीर नजर आती है

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