4 अगस्त 2026/ बिलासपुर
बिलासपुर/रायपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने न्यायिक कार्यवाही में अनावश्यक स्थगन को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि अधिवक्ता संघ द्वारा पारित शोक प्रस्ताव के आधार पर सभी प्रकरणों को स्वतः स्थगित नहीं किया जा सकता।हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की एकल पीठ ने रायपुर के भाड़ा नियंत्रक (Rent Controller) को निर्देश दिया कि भविष्य में अधिवक्ता संघ के शोक प्रस्ताव को आधार बनाकर सभी मामलों की सुनवाई स्वतः स्थगित न की जाए।अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस प्रकार का स्थगन कानून सम्मत नहीं है और इसे अवैधानिक माना जाएगा। साथ ही, संबंधित याचिकाकर्ता के लंबित वाद का तीन माह के भीतर निराकरण करने का निर्देश भी रायपुर भाड़ा नियंत्रक को दिया है।इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब रोकने और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के इस आदेश से भविष्य में शोक प्रस्ताव के कारण सभी मामलों के स्वतः स्थगन की प्रथा पर प्रभाव पड़ने की संभावना है।



















Leave a Reply