रायपुर, 7 अगस्त। राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर आज रायपुर के दीनदयाल ऑडिटोरियम में राज्य स्तरीय भव्य समारोह आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समारोह की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करेंगे, जबकि ग्रामोद्योग एवं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा संघ के नए प्रीमियम ब्रांड ‘कोशल फेब’ का शुभारंभ और ‘बिलासा’ लोगो का लोकार्पण किया जाएगा। इसके साथ ही इन्वेंटरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, पुरस्कृत बुनकरों की डायरेक्टरी तथा टाई-डाई एवं बांधनी रंगाई पर आधारित पुस्तक का विमोचन भी होगा।कार्यक्रम के दौरान बुनकरों, हस्तशिल्पियों, रेशम कृषकों और माटीशिल्पियों को विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये की सहायता और सामग्री वितरित की जाएगी। कक्षा 10वीं और 12वीं के 935 मेधावी विद्यार्थियों को 81.83 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वहीं 17 वरिष्ठ बुनकरों को सम्मानित किया जाएगा तथा 8 उत्कृष्ट बुनकरों को एक-एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि और प्रशस्ति पत्र प्रदान किए जाएंगे।इसके अलावा 49 बुनकरों को आवास निर्माण के लिए 1.22 करोड़ रुपये, 5 बुनकर समितियों को भवन निर्माण के लिए 75 लाख रुपये तथा 85 बुनकरों को उन्नत उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 14.92 लाख रुपये की स्वीकृति दी जाएगी। रेशम कृषकों को 15 लाख रुपये की सहायता, माटीशिल्पियों को विद्युत चाक, हस्तशिल्पियों को टूल-किट तथा जशपुर के ग्राम गोरिया में ग्लेजिंग यूनिट की स्थापना के लिए 2.86 करोड़ रुपये की स्वीकृति भी प्रदान की जाएगी। बुनकर नेत्र परीक्षण अभियान के तहत पात्र बुनकरों को चश्मों का वितरण भी किया जाएगा।समारोह का प्रमुख आकर्षण छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वस्त्र संस्कृति पर आधारित विशेष फैशन शो होगा, जिसमें कोसा सिल्क और हैंडवुवन कॉटन से तैयार परिधानों का प्रदर्शन किया जाएगा। इस शो में बस्तर की युवा प्रतिभाएं पेशेवर मॉडलों और मिस इंडिया अर्थ 2026 अनुष्का सोने के साथ रैंप पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगी।राज्य स्तरीय इस आयोजन में प्रदेशभर से बुनकर, हस्तशिल्पी, रेशम कृषक, माटीशिल्पी और जनप्रतिनिधियों की बड़ी संख्या में शामिल होने की उम्मीद है। समारोह का उद्देश्य हाथकरघा उद्योग को बढ़ावा देना, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करना और पारंपरिक बुनकरी कला से जुड़े कारीगरों का सम्मान करना है।













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