श्रृंगी ऋषि तपोस्थली बोडन जिला अमरावती महाराष्ट्रऐसी मान्यता है कि त्रेता युग में यह स्थान श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली रही है गुफा में जागृत शिवलिंग उन्हीं के द्वारा पूजित रहा है l1920 में गुफा में दुर्गम मार्ग होने से दिव्य शिवलिंग को बाहर स्थापित कर दिया गया जहां आज सभी श्रद्धालुओं दर्शन लाभ प्राप्त करते हैं गुफा का द्वार शिवरात्रि को खोला जाता है lयह महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में आता है यहां की राजकुमारी इंदुमती महाराज दशरथ की माता श्री थी तथा विदर्भ राज्य के श्रृंगी ऋषि प्रधान पुरोहित थे lद्वापर युग में यहां पर माता रूकमणि प्रतिदिन जलाभिषेक किया करती थी lऐसी मान्यता है कि यहां पर माता रुक्मणी के साथ भगवान कृष्ण की पधारे थे lत्रेता युग, द्वापर युग तथा वर्तमान कलयुग से संबंधित इस पवित्र आश्रम के दर्शन लाभ प्राप्त करावे lयह तपोस्थली अमरावती जिला मुख्यालय से चांदूर रेलवे रोड पर मात्र 10 किलोमीटर दूर स्थित है तथा अकोला जंक्शन से 90 किलोमीटर दूर है English श्रृंगी ऋषि तपोस्थली (बोडन, अमरावती) महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में स्थित एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक आश्रम है। अमरावती जिला मुख्यालय से चांदूर रेलवे रोड पर मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान तीनों युगों (त्रेता, द्वापर और कलियुग) की पौराणिक मान्यताओं का केंद्र है।प्रमुख पौराणिक एवं ऐतिहासिक तथ्य:त्रेतायुग का संबंध: ऐसी मान्यता है कि यह स्थान श्रृंगी ऋषि की तपोस्थली था। विदर्भ राज्य के प्रधान पुरोहित होने के नाते उनका संबंध महाराज दशरथ से था। विदर्भ की राजकुमारी इंदुमती ही महाराज दशरथ की माता थीं।जागृत शिवलिंग: यहाँ की गुफा में स्थित जागृत शिवलिंग श्रृंगी ऋषि द्वारा पूजित है। गुफा का दुर्गम मार्ग होने के कारण वर्ष 1920 में इस दिव्य शिवलिंग को बाहर स्थापित किया गया। वर्तमान में श्रद्धालु बाहर स्थित शिवलिंग के ही दर्शन करते हैं और गुफा का द्वार केवल शिवरात्रि के दिन ही खोला जाता है।द्वापरयुग का संबंध: द्वापर युग में माता रुक्मणी यहाँ प्रतिदिन जलाभिषेक करने आती थीं। ऐसी मान्यता है कि माता रुक्मणी के साथ भगवान कृष्ण भी इस पवित्र स्थान पर पधारे थे।यात्रा की जानकारी:दूरी: अमरावती से 10 किमी और अकोला जंक्शन से 90 किमी।दर्शन का समय: शिवलिंग के दर्शन वर्ष भर किए जा सकते हैं, जबकि मुख्य गुफा के दर्शन विशेष रूप से महाशिवरात्रि के पर्व पर होते हैं।अमरावती और अकोला के बीच स्थित इस पवित्र गुफा और शिवलिंग के दर्शन हेतु जाने के लिए महाशिवरात्रि (फरवरी/मार्च) के दौरान मुख्य गुफा के दर्शन का विशेष महत्व है, जो इसे और भी आकर्षक बनाता है। यह लेख जानकारी पुरातात्विक विभाग डिजिटल संचार अमरावती के लोग द्वारा प्राप्त जानकारी रिसर्च के आधार पर आधारित है
लखन शर्मा सिखवाल व्यास
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