सिखवाल ब्राह्मण समाज महिला मंडल और पांच पट्टी सिखवाल ब्राह्मण समाज इंदौर द्वारा श्रीमद् भागवत कथा सुनने भक्तों की भीड़।

मध्य प्रदेश इंदौर में सिखवाल ब्राह्मण समाज महिला मंडल और पांच पट्टी सिखवाल ब्राह्मण समाज इंदौर द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में बड़ी संख्या में सिखवाल ब्राह्मण समाज की महिला पुरुष और बच्चे शामिल हुए, कथा व्यास वाचन, पंडित कपिल शर्मा जी विद्या धाम वाले राधे गुरुजी के मुखारविंद से कथा में बताया की इस 7 दिन की कथा सुनने के लिए आपको अपने घर परिवार की सब सांसारिक सुख दुख की बातचीत अपने मन को चित को पूर्ण रूप से अपना ध्यान लगाए यहां लगाकर सुनना हैं। श्रीमद् भागवत कथा में,माहात्म्य में धुंधुकारी की कथा का विशेष महत्व के (प्रसंगानुसार) सुनाई यह कथा मुख्य रूप से भागवत श्रवण की महिमा और प्रेत योनि से मुक्ति को दर्शाती है।कथा का सारांश 📖तुंगभद्रा नदी के किनारे आत्मदेव नामक एक सदाचारी ब्राह्मण अपनी पत्नी धुंधुली के साथ रहते थे। संतान न होने के दुख में एक संन्यासी के दिए फल से उन्हें दो पुत्र प्राप्त हुए—एक का नाम धुंधुकारी और दूसरे का नाम गोकर्ण (जो वास्तव में गाय के गर्भ से जन्मे थे और अत्यंत ज्ञानी थे)।धुंधुकारी के कुकर्म: धुंधुकारी अत्यंत दुराचारी, चोर और हिंसक निकला। उसने अपने माता-पिता को प्रताड़ित किया और अंततः वेश्याओं के हाथों मारा गया। अकाल मृत्यु और भयंकर पापों के कारण वह प्रेत योनि में चला गया।श्रीमद्भागवत से मुक्ति: जब उसका भाई गोकर्ण वापस आया, तो प्रेत बने धुंधुकारी ने अपनी मुक्ति की गुहार लगाई। गोकर्ण जी ने सूर्य देव की आज्ञा से उसके लिए सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन किया।बांस की सात गांठे: धुंधुकारी प्रेत रूप में वायु का आहार कर एक सात गांठ वाले बांस में बैठ गया। कथा के प्रत्येक दिन (प्रथम से लेकर सप्तम दिन तक) भागवत महापुराण के स्कंध श्रवण के प्रभाव से बांस की एक-एक गांठ फटती गई। सातवें दिन सातों गांठे टूट गईं और धुंधुकारी दिव्य रूप धारण कर भगवान के धाम (वैकुंठ) चला गया।कथा का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व 🌟महापापियों का उद्धार: यह कथा यह सिद्ध करती है कि श्रीमद्भागवत कथा में इतनी शक्ति है कि यह भयंकर से भयंकर पापी और प्रेत योनि में भटक रहे जीव को भी मोक्ष प्रदान कर सकती है।एकाग्रता का महत्व (बांस की गांठे): धुंधुकारी ने बांस के भीतर बिना हिले-डुले, भूख-प्यास भूलकर पूरी एकाग्रता और श्रद्धा के साथ कथा सुनी। यह श्रोताओं को सिखाता है कि कथा का पूर्ण लाभ तभी मिलता है जब मन स्थिर हो।कुसंगति का दुष्परिणाम: धुंधुकारी का चरित्र दिखाता है कि गलत संगति और संस्कारों की कमी व्यक्ति को विनाश की ओर ले जाती है।कर्म और संगति की सीख: “जैसा खाओगे अन्न, वैसा होगा मन”। यह कथा कर्मों की प्रधानता और धार्मिक रीति-नीति से जीवन जीने की प्रेरणा देती है।दूसरे दिन की कथा में इस प्रसंग के बाद अक्सर ध्रुव चरित्र, कपिल देवहूति संवाद अथवा सती प्रसंग की शुरुआत होती है। सनातन धर्म अधिमास में कथा करवाना और सुना बहुत बड़ा महत्व होता है क्योंकि हर 3 साल में एक बार ही अधिमास आता है इस पुण्य के लिए इसी श्रीमद् भागवत कथा पांच पट्टी सिखवाल ब्राह्मण समाज एवं महिला मंडल इंदौर द्वारा आयोजित किया गया है,।

इस श्रीमद् भागवत कथा सीधा प्रसारण आप jio TV चैनल नंबर 2001 और अमृतवाणी की यूट्यूब चैनल पर देखे ,प्रतिदिन दोपहर 3:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक 1 जून से 7 जून तक स्थान संघ ऋषि धर्मशाला शीतला माता बाजार इंदौर

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