खेल मैदानों का व्यावसायिक उपयोग नहीं होगा, स्कूलों में 1098 हेल्पलाइन अंकित करना होगा अनिवार्य, पॉक्सो मामलों में जागरूकता, ड्रॉपआउट बच्चों की ट्रैकिंग और सुरक्षित स्कूल वातावरण पर विशेष कार्य होंगे।

धमतरी 31 जुलाई

छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश के खेल मैदानों का किसी भी स्थिति में व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जाएगा। जिन मैदानों का अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग हो रहा है, उन्हें तत्काल खाली कराकर बच्चों के खेलकूद के लिए उपलब्ध कराया जाए।धमतरी जिला मुख्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ. शर्मा ने सभी सरकारी और निजी विद्यालयों की दीवारों एवं प्रमुख स्थानों पर चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 तथा संबंधित बाल कल्याण पुलिस अधिकारी का नाम और संपर्क विवरण अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। बैठक में कलेक्टर अबिनाश मिश्रा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित पुलिस, शिक्षा और बाल संरक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।बैठक में पिछले तीन वर्षों में स्कूल छोड़ चुके (ड्रॉपआउट) बच्चों का घर-घर जाकर सत्यापन करने के निर्देश दिए गए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी बच्चा बाल श्रम, बाल विवाह या मानव तस्करी का शिकार न हो। साथ ही विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए पृथक एवं स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल तथा पर्याप्त खेल सामग्री उपलब्ध कराने पर भी विशेष जोर दिया गया।डॉ. शर्मा ने पुलिस विभाग को पॉक्सो (POCSO) कानून के प्रति व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने और प्रत्येक थाने में बाल कल्याण अधिकारी की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराना सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी है तथा बच्चों के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।बैठक में बताया गया कि धमतरी जिले में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से 81 मिनी स्टेडियमों में खेल गतिविधियां संचालित की जा रही हैं और 36 प्रशिक्षण केंद्रों के जरिए 1,160 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहीं शिक्षा विभाग ने 34 बालिका एवं 84 बालक शौचालयों के निर्माण का प्रस्ताव जिला पंचायत को भेजा है। जिला बाल संरक्षण इकाई ने जून 2026 के अभियान में 6 बालिकाओं और बाल श्रम में संलग्न 1 बालक का रेस्क्यू किया, जबकि पिछले तीन वर्षों में 30 बच्चों का सफल पुनर्वास किया जा चुका है।बैठक के अंत में आयोग की अध्यक्ष ने सभी विभागों को बेहतर समन्वय के साथ बच्चों के हितों से जुड़ी योजनाओं को संवेदनशीलता, जवाबदेही और प्रभावी ढंग से धरातल पर लागू करने के निर्देश दिए।

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